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जानिए प्राइवेट स्कूल आपको कैसे बर्बाद कर रहा है ? | Private School Scams | Education Scam

 जानिए प्राइवेट स्कूल आपको कैसे बर्बाद कर रहा है ? | Private School Scams | Education Scam


दोस्तों आज के इस आर्टिकल में देखिए प्राइवेट स्कूल कैसे फ्रॉड करते हैं। अगर आप भी अपने बेटे को प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं तो आज के आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें। दोस्तों एक वक्त हुआ करता था। जब स्कूल में पढ़ाने वाले टीचर को गरीब समझ जाता था। लेकिन आज कहानी पूरी तरह से बदल गई है।

जानिए प्राइवेट स्कूल आपको कैसे बर्बाद कर रहा है ? | Private School



क्योंकि अगर आपको पढ़ना आता है तो आप करोड़पति भी बन सकते हैं। तभी तो इतने सारे एजुकेशन बिजनेस चल रहे। हैं जी हां आज के समय में एजुकेशन से बड़ा कोई बिजनेस बचाई नहीं है। और की सबसे पहले शुरुआत प्राइवेट स्कूल वालों ने की है। जहां अगर बच्चे की फीस जमा नहीं है तो उसे पूरी क्लास के सामने बेइज्जत कर दिया जाता है। और क्लास से बाहर निकाल दिया जाता है।

यहां तक की मार पिटाई जैसे मामले भी सामने आए हैं। पर आखिर ये सब अब हो कैसे रहा है? किस तरह प्राइवेट स्कूल वाले फ्रॉड करते हैं? आज की इस आर्टिकल में मैं यानी आपका दोस्त पवन इन सारी चीजों का कच्चा चिट्ठा खोलना वाला हूं। बस मेरे साथ आर्टिकल में इसी तरह बने रहना। दोस्तों भारत के एजुकेशन सिस्टम में दो दिक्कत है। जहां इसमें नई एजुकेशन है नई सिस्टम गुरुकुल व्यवस्था में आज मॉडर्न स्कूल तक का सफर काफी हैरान करने वाला रहा है। क्योंकि अगर देखा जाए तो मॉडर्न एजुकेशन सिस्टम अंग्रेजों की देन है।

और आपको यह जानकर आपको हैरानी होगी। कि 25 करोड़ स्टूडेंट में से 12 करोड़ प्राइवेट स्कूल में है। और पिछले 9 सालों में स्कूलों में 67000 स्कूल प्राइवेटली ऑपरेट किए जा रहे हैं। भारत में एक तिहाई बच्चे अपनी शिक्षा प्राइवेट सेक्टर से प्राप्त कर रहे हैं। 

देखा जाए तो 1991 में एलपीजी रिफॉर्म्स (LPG Reforms) के आने के बाद प्राइवेट एजुकेशन की ग्रोथ तेजी से होने लगी। यूनेस्को की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट के मुताबिक हर 10 में से 7 स्कूल प्राइवेट तौर पर खुल गए हैं। और यह डाटा प्राइमरी एजुकेशन का 45% है और सेकेंडरी एजुकेशन क्या है 51% प्रतिशत और टेरिटरी में 57% एजुकेशन सिस्टम प्राइवेट है। हैरान करने वाली बात यह है कि बड़े-बड़े बिजनेसमैन और पॉलीटिशियंस के स्कूल भारत में चल रहा है।

वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्रांड वैल्यू उनकी सफलता की कुंजी है। और यह सब इसलिए होता है कि एजुकेशन की क्वालिटी अच्छी नहीं होती। इसलिए इंफ्रास्ट्रक्चर देख कर लोगों को लूटा जाता है। डेवलप्ड नेशंस के द्वारा हर 3 साल में प्रोग्राम फॉर इंटरनेशनल स्टूडेंट असेसमेंट का आयोजन किया जाता है। यह 15 साल के बच्चों का बेसिक मैथमेटिक्स और साइंस रीडिंग एबिलिटी का टेस्ट करतीं है। भारत ने इसमें केवल दो बार हिस्सा लिया था। और परिणाम बहुत ही हैरान करने वाले थे। क्योंकि भारत के कई बड़े-बड़े स्कूल के बच्चों ने टेस्ट दिया था और टोटल 73 देश के बीच इस टेस्ट में भारत की रैंक 72 आई थी। यानी हम केवल किर्गिस्तान से आगे थे। 

अब आप सोच लीजिए कितनी शर्म की बात है। वही कंपटीशन में सिंगापुर हांगकांग और जापान में सबसे अच्छा परफॉर्म किया था। दोस्तों बात अगर क्वालिटी ओफ एजुकेशन की करें तो केंद्रीय विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय ने 10वीं और 12वीं के बोर्ड रिजल्ट में लगातार 99% का सक्सेस रेट दिया है। जबकि उनके कंपैरिजन में प्राइवेट स्कूल की परफॉर्मेंस काफी ज्यादा निराशाजनक रही। देखा जाए तो प्राइवेट स्कूल के एक्सक्लूसिव रिजल्ट्स और बच्चों के ऊपर बेहतर परफॉर्म करने का भार डालना हमेशा ऐसे ही स्ट्रेटजी रही है। 

पर सवाल यह खड़ा होता है। जो प्राइवेट स्कूल की फीस भी महंगी है। यहां पर बच्चों की पढ़ाई भी उतनी ज्यादा बेहतर नहीं होती हैं। परफॉर्म नहीं कर पा रहे हैं। तो फिर क्यों भारत में लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ना चाहते हैं। दोस्तों इसी चीज को लेकर जब एक सर्वे किया गया तो 73 प्रतिशत पैरंट्स ने अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ने का निर्णय लिया। क्योंकि उनके हिसाब से जो सरकारी स्कूल होता है। उनकी उम्मीदों पर खड़े नहीं उतरने और इनमें से 12% पैरंट्स ने सिर्फ इसलिए प्राइवेट स्कूल को चुना क्योंकि वहां पर इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई होती है। और 10% पैरंट्स ने तो मजबूरी में प्राइवेट स्कूल प्रेफर किया। क्योंकि वहां पर आसपास गवर्नमेंट स्कूल है ही नहीं। दोस्तों एजुकेशन एक ऐसा फील्ड है जिसमें स्टेट और केंद्रीय दोनों गवर्नमेंट अपने नियम कानून बना सकते हैं। तभी तो हर स्टेट का अपना एजुकेशन बोर्ड होता है और उनकी टेक्स्ट बुक भी अलग होती है।

ऊपर से जो स्टेट बोर्ड वाले स्कूल होते हैं उनकी सबसे बड़ी समस्या तो बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की है। जाहा तो प्रॉपर क्लासरूम नहीं होते हैं। नहीं साफ सुथरा और अलग टॉयलेट होते हैं। और साइंस और कंप्यूटर लैब जैसी कोई सुविधा सरकारी स्कूल के बच्चों को नहीं मिल पाती हैं। अन्य चक्करों में माता-पिता अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ने देना चाहते। जबकि दूसरी इतनी बड़ी समस्या यह है कि गवर्नमेंट स्कूलों में टीचर्स भी इतने ज्यादा अच्छे नहीं होते। या फिर कह लीजिए वह अच्छे तो होते हैं। लेकिन सरकार की तरफ से उन्हें बंदी तनख्वाह हर महीने आ जाती है। फिर चाहे वह बच्चों को पढ़ा है या ना पढ़ाना हैं। इसी चक्कर में सरकारी स्कूल के जो टीचर्स होते हैं वह आलसी हो जाते हैं। और सरकारी स्कूल में कोई अपने बच्चों को पढ़ना नहीं चाहता लेकिन खुद वहां पर टीचर बनकर हर कोई पढ़ना चाहता है। क्योंकि अच्छी सैलरी में उन्हें कम रिस्पांसिबिलिटी झेलनी पड़ती है। तभी तो आपको आए दिन ऐसे वायरल वीडियो मिल जाएंगे। जहां सरकारी टीचरों को बेसिक चीज भी नहीं पता जिन्हें देखकर ऐसा लगता है। पता नहीं इन्हें किसने टीचर बना दिया भाई और सरकारी स्कूल की नहीं सारी समस्याओं की वजह से प्राइवेट स्कूल में बच्चों की तादाद बढ़ती जा रही है। और उनका धंधा भी बढ़ता चला जा रहा है। जिसके चक्कर में प्राइवेट स्कूल वाले लोगों से मनमानी फीस मांगते हैं। और अगर कोई इंसान एक महीने या फिर 2 महीने फीस देने में पीछे रह जाए तो बच्चे को पूरी क्लास क्लास के सामने बेइज्जत किया जाता है। और यह चीज लगातार सालों से चलती आ रही है। प्राइवेट स्कूल में अच्छी बात है कि यह है कि जब बच्चे वहां पढ़ने जाते हैं तो स्कूल के टीचरों पर ध्यान देते हैं।

पर इन्हीं सारी चीजों का स्कूल वाले अच्छा खासा पैसा भी वसूल करते हैं। और सीधे-सीधे आम लोगों को ठगते हैं। अब आप बोलेंगे भला हम इसमें क्या कर सकते है? पूरा का पूरा एजुकेशन सिस्टम तो बदला नहीं जा सकता ना। तो दोस्तों आप बिल्कुल सही सोच रहे हैं। हम एजुकेशन सिस्टम को नहीं बदल सकते लेकिन हां हम बदलाव की तरफ अपना पहला कदम जरूर उठा सकते हैं। क्योंकि अगर कोई अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने की हिम्मत दिखाएगा तो सरकार के ऊपर भी प्रेशर बनेगा। 

और इतना ही नहीं भारत में तो यह नियम भी होना चाहिए कि जितने भी सरकारी कर्मचारी है वह अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ायें. क्योंकि अगर यह नियम बन गया तो? सरकारी स्कूल में बैठकर जो टीचर मक्खी मारते हैं। 

उनकी आंखें खुल जाएगी और काफी कुछ बेहतर देखने को मिलेगा। उसी के साथ सरकारी स्कूलों में जितने भी समस्या है। अगर लोगों ने उनपर आवाज़ उठाएं तो वह भी बेहतर हो सकती है। बस की उम्मीद आपको आर्टिकल पसंद आया होगा बाकी आपका एजुकेशन सिस्टम पर क्या कहना है कमेंट में बताइएगा और इसी तरह की आर्टिकल को पढ़ने केलीये हमसे जुडे रहे। धन्यवाद…….

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